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मिशन आल आउट कश्मीर।

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मिशन आल आउट कश्मीर साल 2014 में जब नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री बने थे, तभी ये साफ हो गया था कि अब भारत पाकिस्तान को उसी के अंदाज में जवाब देगा। हुआ भी कुछ ऐसा, भारतीय सेना ने अपनी जाबांजी का परिचय देते हुए कई बार दुश्मनों के दांत खट्टे किए। समय समय पर जवानों ने सीजफायर का उल्लंघन कर रहे आतंकियों को मार गिराया। ऐसी ही सेना ने सोमवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए पुलिस के साथ एक संयुक्त ऑपरेशन में जैश-ए-मोहम्मद के 6 आतंकियाें को मार गिराया। निश्चित रूप से सेना ने इस कार्रवाई से साफ संकेत दे दिए हैं कि, पाकिस्तान अपनी नापाक हरकतों से बाज आए। सेना का ऑल-आउट ऑपरेशन साल 2017 में भारतीय सेना ने ऑपरेशन ऑल आउट चलाया था जिसमें जम्मू-कश्मीर में सेना ने साल 2017 में 200 आतंकियों को मार गिराया था। पूरे साल आतंकियों पर कार्रवाई जारी रही, यही कारण रहा कि इस साल जितने आतंकी मारे गए उतने एक दशक में कभी नहीं मारे गए। आंकड़ां की बात करें तो वर्ष 2011 से 2017 तक सेना ने करीब 600 आतंकियाें को मौत के घाट उतारा, जिसमें 200 आतंकी तो पिछले साल ही सेना का शिकार बने। साल 2017 से ऑपरेशन ऑल आउट के तहत ...

संघर्ष जिंदगी है जीना इसे पड़ेगा

इस दुनिया में शायद ही कोई इंसान होगा जिसके जीवन में कठिनाइयाँ ना हों। जब तक जीवन चलता है सुख और दुःख दोनों साथ चलते रहते हैं। लेकिन हर कठिनाई के साथ एक अच्छा सबक छिपा होता है। इतिहास गवाह है कि जिस व्यक्ति ने अपनी कठिनाइयों का सामना करके उनसे पार पाया है वही आगे जाके सफल हुआ है। यूँ तो कठिनाई आने पर हर इंसान विचलित हो जाता है, आप भी और मैं भी। लेकिन हमें कठिनाइयों से लड़ना सीखना है, आइये आज इस विषय पर थोड़ा गौर फरमाते हैं – क्या करें जब आप कठिनाइयों से घिरे हों खुद को दें सलाह – स्वामी विवेकानन्द ने कहा है कि अगर कोई शख्स आपकी सच्ची मदद कर सकता है तो वो हैं खुद “आप”। जब आप किसी कठिनाई में फँसे हों तो थोड़ी देर के लिए भूल जाइये कि आप मुसीबत में हो और अपनी सारी परेशानियाँ मुझ पर डाल दीजिये। ये सोचिये मैं यानि “पवन कुमार” मुसीबत में है तो अब आप मुझे क्या सलाह देंगे। ठन्डे दिमाग से सोचिये मुझे कठिनाई से निकलने की सलाह दीजिये। फिर देखिये आप खुद ही अपनी समस्या का समाधान कर लेंगे। समस्या मेरे साथ ही क्यों? बहुत सारे लोग अक्सर मन ही मन खुद को कोसते हैं कि सारी समस्यांए मेरे साथ ही ...

Congratulations BB-11 winner Shilpa Shinde

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Really the Nation’s Heartthrob & the most popular & deserving contestant in the history of Bigg boss SHILPA SHINDE is the winner of #BiggBoss11 . She has won the game with HUMONGOUS margin . Kaha tha na.. Jo dil jeetna jaante hai woh Kabhi haarte nahi.. congratulations #Shilpians After entertaining viewers for more than three months, Bigg Boss 11 has come to an end with Shilpa Shinde as the winner of the controversial reality series . The 'Bhabhi Ji Ghar Par Hain' fame actress bagged the trophy along with a cash prize of Rs 44 lakh. The actress, who entered the house with rival Vikas Gupta, kept the audiences engaged right from the start. Her fights with Vikas became the talking point of the season, specially in the first few weeks. Be it her bonding with Akash Dadlani, Arshi Khan and Puneesh Gupta or her being called as the 'Maa' of the house, Shilpa's journey has been entertaining. Her rivalry with Vikas Gupta and their bonding laterleft many ton...

Our choice is youth politics

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The Youth in politics The topic itself is interesting for us. According to my viewpoint, Youth in politics is a great idea. Because young India is much more enthu. Why the youth? Reasons most suggested are that a young mind knows the new techniques to handle the situation. They are aware of and accept the new technologies fast. They also possess the education power and they can really connect well to the young Indians. But on another side, we forget that experience is the best teacher. The not young minds are experienced. They are calmer and can solve difficult matters patiently. And note sometimes not all youth in politics are educated only some are "Bade baap ki Bigdi huvi Aulad". To conclude I would say it should be a combo of OLD EXPERIENCED once and energize, easily accepting the new variations in society and taking care of old tradition and our Indian constitution in mind -The Youth.     Activist Pramod Kr Pandey     Uttar Pradesh Distt -Bas...

समाज की महत्वपूर्ण बातें।

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क्या ज्यादा पैसे होने से आदमी को पूर्ण सुख प्राप्ति होती है? इसे हम तीन युवकों के उदाहरण से समझने की कोशिश करेंगे. मान लें कि तीनों की उम्र 25 साल है. पहला युवक एक साल में 24 लाख कमाता है (2 लाख रुपए प्रतिमाह). दूसरा एक साल में 12 लाख कमाता है (1 लाख रुपए प्रतिमाह) और तीसरा एक साल में 3 लाख कमाता है (25 हजार रुपए प्रतिमाह) क्या आप बता सकते हैं कि इन तीनों में से सबसे सुखी कौन होगा? क्या पहले युवक को इतने अच्छे पैकेज पर काम करने के कारण सबसे अधिक सुखी नहीं होना चाहिए? हो सकता है. लेकिन हमें अभी और डेटा चाहिए. हमारी जानकारियां पर्याप्त नहीं हैं. हम और अधिक सूचना एकत्र करेंगे. पहला युवक अपने घर-परिवार से दूर रहता है. उसे सप्ताह में सातों दिन चौबीसों घंटे ज़रूरी फोन कॉल्स और असमय मीटिंग्स के लिए तैयार रहना पड़ता है. दूसरा युवक अपने परिवार के साथ रहता है और उसे हर वीकेंड पर छु्ट्टी मिलती है. तीसरे युवक के साथ भी यही होता है. अब बताइए कि इन तीनों में सबसे सुखी कौन है? अब आपको लग रहा होगा कि पहले और दूसरे युवक में ही सबसे सुखी होने की खींचत...

राष्ट्र हित पर चिंतन।

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स्वयं चितंन करे । सुप्रीम कोर्ट के चार वरिष्ठ जजो के प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद पूरे देश मे बहसJ छिड़ गयी है और यह इल्जाम स्पष्ट हुआ कि सुप्रीम कोर्ट के आंतरिक तंत्र में कही न कही कमी है। अब यह सोचने का विषय है कि? ० जो तांत्रिक खामिया है क्या यह मुख्य न्यायधीश दीपक मिश्रा के आने के बाद हुई? निश्चित तौर पर यह इल्जाम यही साबित कर रहे है जब से दीपक मिश्रा जी कार्यकाल संभाले है तब से यह असहमतियां उत्पन्न हुई है। ०क्या इन चंद 3 महीनों में कमियां आयी? ०क्या दीपक मिश्रा जी के आने से फैसले लेने में असुविधा बढ़ी? ०क्या आज के 4 महीने  पहले सब कुछ सही था ? ०क्या तंत्रात्मक गतिविधिया पूर्ण रूप से अपने आप मे स्पस्ट थी ? अगर इन आत्म प्रश्नों पर गौर किया जाए तो सच्चाई कुछ और ही बया हो रही है? कड़वा सच जब कोई व्यक्ति अच्छा काम करने की प्रेरणा से आगे बढ़ता है तो कहि न कही प्रत्यक्ष/अप्रत्यक्ष रूप से आस पास के लोग उसके निर्णय से प्रभावित होते है/और वही लोग प्रभावित होकर गलत और सही का निर्णय करने लगते है / क्यों कि मोदी आज 03 वर्षो से आये है और देश का ये हाल आज के चंद व...

युवा प्रेरणा स्रोत स्वामी विवेकानंद जी।

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कर्म योगी युवाओं के प्रेरणा स्रोत स्वामी विवेकानंद जी राष्ट्रीय युवा दिवस भारत के युग निर्माता स्वामी विवेकानंद जी आज जन्म तिथि है यह ऐसा दिन है जिस दिन धरती माँ भी अपने आप को ऐसे पुत्र पा कर धन्य हुई। स्वामी विवेकानंद की गिनती भारत के महापुरुषों में होती है । उस समय जबकि भारत अंग्रेजी दासता में जी मर रहा था, भारत माता ने एक ऐसे लाल को जन्म दिया जिसने भारत के लोगों का ही नहीं, पूरी मानवता का गौरव बढ़ाया । उन्होंने विश्व के लोगों को भारत के अध्यात्म का रसास्वादन कराया । इस महापुरुष पर संपूर्ण भारत को गर्व है । संक्षिप्त परिचय इस महापुरुष का जन्म 12 जनवरी, 1863 ई. में कोलकाता के एक क्षत्रिय परिवार में श्री विश्वनाथ दत्त के यहाँ हुआ था । विश्वनाथ दत्त कलकत्ता हाई कोर्ट के नामी वकील थे । माता-पिता ने बालक का नाम नरेन्द्र रखा । नरेन्द्र बचपन से ही मेधावी थे । उन्होंने 1889 में मैट्रिक की परीक्षा उत्तीर्ण कर कोलकाता के ‘ जनरल असेम्बली ’ नामक कॉलेज में प्रवेश लिया । यहाँ उन्होंने इतिहास, दर्शन, साहित्य आदि विषयों का अध्ययन किया । नरेन्द्र ने बी.ए. की परीक्षा प्रथम श्रेणी में...